Asian Para Games 2018: तीरंदाज़ राकेश करेंगे देश को रिप्रेसेन्ट, एक सड़क हादसे के बाद 3 बार किया था खुदकुशी का प्रयास

जम्मू-कश्मीर के कटरा के रहने वाले राकेश कुमार अपनी जिंदगी में बहुत खुश थे लेकिन आठ साल पहले उनके साथ एक ऐसी घटना घटी जिसने उनकी जिंदगी ही बदल दी। एक सड़क हादसे में राकेश अपाहिज हो गए, जिसके कारण उन्होंने जीने की आस छोड़ दी थी। वहीं पिछले साल तीरंदाज़ी कोच कुलदीप कुमार वेदवान से मिलने के बाद राकेश के मन में जीने की चाह जगी और जो व्यक्ति कभी आत्महत्या करने की सोच रहा था आज वही राकेश पैरा एशियन खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए जा रहे हैं। स्पोर्ट्सग्रेनी द्वारा राकेश कुमार के साथ हुई खास बातचीत के कुछ अंश:

सवाल 1. अपनी जिंदगी के बारे में कुछ बताएं? आपका एक्सिडेंट कैसे हुआ और इसके कारण आपकी जिंदगी में क्या-क्या बदलाव आए?
जवाब. “मेरी लाइफ बहुत अच्छी चल रही थी लेकिन आठ साल पहले यानी 2010 में मेरी गाड़ी का एक्सिडेंट हो गया, जिसने जिंदगी में बहुत कुछ बदलाव ला दिया। गाड़ी में हम सात लोग थे, जिनमें से पांच लोगों की मृत्यु हो गई और मैं और मेरे एक साथी इस हादसे में जीवित बचे। हम बच तो गए लेकिन हमें बहुत गंभीर चोंट आईं। मैं करीब एक साल तक चोंट के कारण बिस्तर पर रहा और उसके बाद से व्हीलचेयर के सहारे हूं। मुझे मेरे परिवार, रिश्तेदार और डॉक्टर्स ने काफी दिलासा दिया था कि मैं बिलकुल ठीक हो जाऊंगा और पहले की ही तरह चलने-फिरने लगूंगा।”

“वहीं जैसे-जैसे समय गुजरता गया और मेरे शरीर में कोई सुधार नज़र नहीं आया तो मुझे एहसास हुआ कि शायद अब मैं कभी भी पहले जैसा नहीं हो पाऊंगा। दिन, महीने, साल गुजरते गए और मेरी हालत वैसे के वैसे ही रही। इस कारण मैं काफी मायूस हो गया था और मेरी जीने की इच्छा खत्म होने लगी। मैंने तीन बार खुदकुशी करने की कोशिश भी की क्योंकि मैं जीना नहीं चाहता था। मैं सोचता था कि अगर मैं खुदकुशी कर लेता हूं तो मेरे परिवार की और मेरी भी परेशानी खत्म हो जाएगी, लेकिन इसमें मुझे सफलता नहीं मिली, शायद ऐसा इसलिए था क्योंकि ऊपर वाले की मर्जी के आगे कुछ नहीं चलता। अब मैं पुरानी बातों को सोचना नहीं चाहता क्योंकि आज मैं जहां हूं इस बारे में मैंने कभी सोचा नहीं था।”

सवाल 2. जब काफी सालों तक आपके शरीर में सुधार नहीं आया तो लोगों की आपके प्रति प्रतिक्रिया कैसी थी?
जवाब. “पहले तो सभी को लगता था कि ठीक हो जाऊंगा लेकिन जब कुछ साल गुजर गए तो लोग दूर होते चले गए। रिश्तेदार और कई दोस्त दूर हो गए क्योंकि उनको लगता था कि इसके पास जाएंगे तो ये बैठे-बैठे हमें अपना कोई काम बता देगा।”

सवाल 3. कोच कुलदीप कुमार वेदवान जी से कैसे मुलाकात हुई?
जवाब. “यह साल 2017 की बात है, जब माता वैष्णों देवी श्राईन बोर्ड ट्रस्ट द्वारा एक महीने का कैंप लगाया था और इस कैंप के लिए कोच कुलदीप जी को बुलाया गया था। एक दिन कोच सर गाड़ी लेकर कहीं घूमने के लिए निकले थे और रास्ते में उनकी नजर मुझपर पड़ी। मैं उस समय व्हीलचेयर पर बैठा था। इसके बाद वो मुझसे मिले और उन्होंने मुझे तीरंदाज़ी की जानकारी दी। मैं तीरंदाज़ी के बारे में कुछ नहीं जानता लेकिन कुलदीप सर ने मुझे इसके लिए प्रोत्साहित किया।”

“उनकी बात सुनने के बाद मुझे एहसास हुआ कि अगर मैं तीरंदाज़ी में जाता हूं तो अच्छा कर सकता हूं। इसके दूसरे ही दिन यानी 27 जून, 2017 को मैं कुलदीप सर से स्टेडियम में मिला और उसी दिन से तीरंदाज़ी सीखना शुरू कर दिया। इसके बाद कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया जहां पर मैंने अपना अच्छा प्रदर्शन करके दिखाने की पूरी कोशिश की। इस साल हम पैरा वर्ल्ड आर्चरी रैंकिंग इवेंट के लिए यूरोप गए थे, जो कि देश के लिए एक ऐतिहासिक पल था। इस इवेंट में पहली बार पैरा आर्चर देश के लिए टीम इवेंट में स्वर्ण पदक लेकर आए, जिसमें मैं और मेरे साथी श्याम सुंदर स्वामी और तारिफ मौजूद थे। आज मैं जहां खड़ा हूं, उसका श्रेय केवल कुलदीप सर को जाता है।”

कोच कुलदीप कुमार वेदवान के साथ, राकेश कुमार, श्याम सुंदर स्वामी और तारिफ।

सवाल 4. आप पैरा एशियन खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए जा रहे हैं। क्या आपको अब ऐसा महसूस होता है कि काश आपने खुदकुशी करने की कोशिश न की होती?
जवाब. “हां, मुझे इस बात का दुख होता है। मैं सोचता हूं कि अगर खुदकुशी करने में मैं सफल हो जाता तो जहां आज मैं हूं वहां कभी नहीं होता। मैं बस यही कहना चाहूंगा कि भगवान को जो मंजूर होता है वही होता है, उनके आगे किसी की नहीं चलती।”

सवाल 5. आज जिस मुकाम पर आप हैं, वहां पहुंचकर आपको कैसा महसूस हो रहा है?
जवाब. “यह किसी भी खिलाड़ी के लिए गर्व की बात होती है कि वह देश के लिए कुछ करे और इंडिया के नाम की जर्सी पहने। मेरा भी यह सपना था कि मेरी जर्सी पर इंडिया लिखा हो जो कि अब पूरा हो चुका है और मैं बहुत खुश हूं। इसके अलावा मैं एक बात और कहना चाहूंगा कि किसी खिलाड़ी के लिए इंडिया का टैग मिलना तो गर्व की बात है ही लेकिन अगर आप अपनी और ज्यादा मेहनत से देश के लिए मेडल लेकर आएंगे तो और भी ज्यादा खुशी होगी।”

सवाल 6. पैरा एशियन खेलों के लिए आपकी क्या तैयारी है?
जवाब. “पैरा एशियन खेलों के लिए हम बहुत मेहनत कर रहे हैं। हमारी तैयारी काफी अच्छी चल रही है और मैं बस यही कामना करता हूं कि मैं बहुत मेहनत करूं और इन खेलों में अपना बहुत अच्छा प्रदर्शन करके दिखाऊं।”

सवाल 7. देश में बहुत से शारीरिक रूप से कमजोर लोग हैं जो कि इस कमी के कारण अपनी आशा और आत्मविश्वास खो देते हैं। उन्हें क्या संदेश देना चाहेंगे?
जवाब. “मैं अपने अनुभव से उन लोगों तक एक ही बात पहुंचाना चाहता हूं कि आपको हिम्मत नहीं हारनी चाहिए क्योंकि अगर आप मजबूत बनेंगे तो आप जीवन में जरूर कुछ न कुछ हासिल कर सकते हो। अगर आपको खुद पर भरोसा है कि आप यह काम कर सकते हो तो भगवान भी आपका साथ देगा।”

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